उंगली पकड़कर मुझे चलना सिखाया,
हर मुश्किल से हमेशा मुझे बचाया।
खुद धूप में रहकर भी जो,
हम पर ठंडी छांव करते हैं,
वो और कोई नहीं, मेरे पापा हैं,
जो हमसे बेइंतहा प्यार करते हैं।
मांगने से पहले ही जो सब कुछ दिला देते हैं,
मेरी एक छोटी सी मुस्कान पर,
वो अपनी सारी थकान भूल जाते हैं।
चट्टान की तरह मजबूत हैं वो,
पर दिल से उतने ही कोमल हैं,
मेरे पापा मेरी दुनिया, मेरा सबसे बड़ा संबल हैं।
सत्यवीर वैष्णव बारां राजस्थान 💞✒️💞
सत्यवीर वैष्णव

बहुत सुंदर प्रस्तुति बेहतरीन
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