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Wednesday, February 4, 2026

मिसेज खम्बानी की 'सुनहरी' सनक

 


मिसेज खम्बानी, एक ऐसी महिला थीं, जिनका जीवन 'गोल्ड' के इर्द-गिर्द घूमता था, लेकिन अजीबोगरीब तरीके से। उनके लिए, "गोल्ड" केवल एक धातु नहीं, बल्कि एक जीवनशैली थी, जो उनके किराने की लिस्ट से शुरू होती थी। वह किसी भी ब्रांड का सामान नहीं खरीदती थीं, जब तक उस पर 'गोल्ड' का लेबल न चिपका हो – टाटा टी गोल्ड, मेरी गोल्ड बिस्कुट, फॉर्च्यून गोल्ड तेल, यहां तक कि उनके डिटर्जेंट पर भी "सर्फ एक्सेल गोल्ड" लिखा होता था (हालांकि ऐसा कोई ब्रांड था नहीं, ये सिर्फ उनकी कल्पना थी)।
मोहल्ले में उनकी इस 'गोल्ड' वाली सनक की चर्चा आम थी। अक्सर दोपहर की किटी पार्टियों में, मिसेज खम्बानी अपनी पड़ोसनों को बतातीं, "अरे सुनिए, हमारे यहां तो सिर्फ गोल्ड वाला ही सामान आता है। और ये जो फॉर्च्यून गोल्ड का तेल है ना, इससे बनी पकौड़ियों का स्वाद ही कुछ और होता है!" उनकी पड़ोसनें, जो अमूमन अपने पतियों की कमाई के हिसाब से हिसाब-किताब रखती थीं, उन्हें बड़े विस्मय से देखतीं। आखिर मिसेज खम्बानी के पति, बेचारे खम्बानी जी, एक स्थानीय नेताजी के दफ्तर में मामूली क्लर्क थे। नेताजी के नाम का रौब तो था, लेकिन खम्बानी जी की तनख्वाह उतनी ही 'गोल्ड' थी, जितनी एक साधारण मिडिल क्लास आदमी की हो सकती है – यानी नाम मात्र की।
इस 'गोल्ड' प्रेम की वजह से मोहल्ले में एक गलतफहमी फैल गई थी। सबको लगता था कि खम्बानी जी के पास अथाह दौलत है, या शायद वो नेताजी का काला धन संभालते हैं। ये बात धीरे-धीरे चोरों के गिरोह तक भी पहुँच गई। उनका सरगना, लाला लंगड़ा, जो अपनी एक टांग से लंगड़ाने के बावजूद चोरी में पीएचडी था, उसने अपने गुर्गों के साथ मीटिंग बुलाई। "भाई, सुना है खम्बानी के घर में सोना ही सोना है। 'गोल्ड' से कम कुछ नहीं खरीदते वो।"
ठीक उसी समय, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कानों तक भी ये खबर पहुँच गई। एक गुमनाम शिकायत मिली थी कि नेताजी का सारा काला धन खम्बानी के घर में छिपा है, क्योंकि उनकी पत्नी 'गोल्ड' के सिवा कुछ नहीं खरीदती। ED के अधिकारी, मिस्टर तेजपाल, जो अपनी कड़क छवि और तेज दिमाग के लिए जाने जाते थे, उन्होंने तुरंत एक टीम खम्बानी निवास की ओर रवाना कर दी।
एक रात, जब चारों ओर सन्नाटा पसरा था, लाला लंगड़ा का सबसे फुर्तीला चोर, चीकू, खम्बानी के घर में सेंध लगाने पहुंचा। उसने बड़ी चालाकी से पिछली दीवार फांदी और बालकनी तक पहुँच गया। लेकिन किस्मत का खेल देखिए! मिसेज खम्बानी ने अपनी नई "गोल्ड" साड़ी (जिसे उन्होंने सेल में ख़रीदा था, जिस पर 'गोल्डन ऑफर' लिखा था) बालकनी में सूखने के लिए डाली हुई थी। चीकू ने जैसे ही छलांग लगाई, वह साड़ी में उलझ गया। साड़ी भी ऐसी कि एकदम नई और मजबूत! चीकू उसमें फँस गया, और फिर फिसलकर बालकनी और दीवार के बीच की पतली सी जगह में जा फँसा, जहां से निकलना असंभव था।
रात भर चीकू वहीं फंसा रहा, "बचाओ! बचाओ!" चिल्लाता रहा। सुबह जब मिसेज खम्बानी अपनी मॉर्निंग वॉक से लौटीं, तो उन्हें बालकनी से अजीब आवाजें सुनाई दीं। उन्होंने देखा, चीकू बुरी तरह फंसा हुआ है। मोहल्ले के लोग इकट्ठा हुए, किसी तरह दीवार तोड़कर बेचारे चीकू को बाहर निकाला गया। मिसेज खम्बानी, अपने चिर-परिचित अंदाज़ में, उसे अंदर ले गईं और गरमा-गरम टाटा टी गोल्ड की चाय और मेरी गोल्ड बिस्कुट खिलाए। "बड़ा बुरा हुआ बेटा, तुमने चोरी करने की क्यों सोची? देखो, भगवान ने तुम्हें सजा दी।"
इस घटना की चर्चा मोहल्ले में आग की तरह फैल गई। ठीक इसी समय, ED की टीम भी खम्बानी निवास पहुँच गई। मिस्टर तेजपाल ने कड़क आवाज़ में पूछा, "मिस्टर खम्बानी, हमें सूचना मिली है कि आपके घर में काला धन है।"
खम्बानी जी का चेहरा सफ़ेद पड़ गया। वह जानते थे कि उनकी पत्नी की 'गोल्ड' वाली सनक ने उन्हें मुसीबत में डाल दिया है। मिसेज खम्बानी, हमेशा की तरह, मुस्कुराते हुए बोलीं, "अरे साहब! काला धन? हमारे घर में तो सब कुछ गोल्ड है!" उन्होंने बड़े गर्व से टाटा टी गोल्ड की चाय और मेरी गोल्ड बिस्कुट पेश किए। "और फॉर्च्यून गोल्ड तेल में तले गरमा-गरम पकौड़े भी बनाए हैं।"
मिस्टर तेजपाल और उनकी टीम ने चाय, बिस्कुट और पकौड़े खाए। उन्हें घर में कहीं भी कोई काला धन नहीं मिला। मिसेज खम्बानी ने हर एक गोल्ड-ब्रांडेड चीज़ को बड़े उत्साह से दिखाया – डिटर्जेंट से लेकर टूथपेस्ट तक।
खम्बानी जी गुस्से से लाल थे। जैसे ही ED वाले चले गए, वह अपनी पत्नी पर भड़क पड़े, "तुम! तुम्हारी इस गोल्ड वाली सनक ने हमारी नाक कटवा दी! पहले चोर फँसा, अब ED वाले आ गए! क्यों करती हो ऐसा?"
मिसेज खम्बानी मासूमियत से बोलीं, "अरे मैंने तो सोचा था कि इससे अपना रुतबा बढ़ेगा! अब देखो, ED वाले भी हमारे यहां चाय-नाश्ता कर गए।"
मिस्टर तेजपाल और उनकी टीम अपने दफ्तर लौट रहे थे। गाड़ी में बैठे-बैठे मिस्टर तेजपाल मुस्कुराए। "लगता है, इस बार हमें 'गोल्ड' की बजाय 'गोल्डन' सबक मिल गया। काला धन नहीं, बस एक महिला का 'गोल्ड' प्रेम!"

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